प्रणव प्राणायाम – Pranav Pranayam in Hindi – 7 Yoga Package

pranav

– अन्य नाम –
ओम का ध्यान

– विवरण –
सभी प्राणायाम करने के बाद अपना ध्यान साँस पर केंद्रित करें, और ॐ का स्मरण करें | शुरुआत में सांस का घर्षण नाक की नोक पर महसूस किया जाएगा।
एक दर्शक बन अपने आप को देखिये | गहरी सांस ले और सांस इतने धीरे लें की उसकी आवाज भी न हो | कोशिश करें की सांस इतनी धीरे लें की अगर नाक के सामने रुई का टुकड़ा भी रख दें तो वो भी न हिलें |
धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाने का प्रयास करें और एक मिनट में एक बार ही साँस लेने का प्रयास करें।
इस प्रकार सांस पर ध्यान देने की कोशिश करें।

– कैसे करें –
अपनी आँखें बंद करो और शांत मन से बैठ जाओ।
स्वाभाविक रूप से साँस लो।
सांसो पर ध्यान केंद्रित करिये और भगवान के बारे में सोचें।
भगवान ने ओम् आकार में हमारी भौहें, आंख, नाक, कान, होंठ, दिल आदि बनाए हैं।
हर कण में भगवान की उपस्थिति की कल्पना कीजिए और ध्यान कीजिए।
अवधि: २ से ३ मिनट या अधिक।

– लाभ –
गहरी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होगा।
प्राणायाम, शारीरिक विकारों पर काबू पा अच्छे स्वास्थ्य का वरदान देता है और भक्त आध्यात्मिकता की राह पर आगे बढ़ता है।
एक दर्शक (= आत्मा) के रूप में हम साँस की लयबद्ध प्रवाह पर हमारा ध्यान केंद्रित करते हैं, तो प्राण स्वचालित रूप से सूक्ष्म हो जाता है, और हम १० से २० सेकंड में एक बार श्वास लेते हैं और १० से २० सेकंड में साँस छोड़ते हैं।
लंबे समय तक अभ्यास के माध्यम से एक योगी एक मिनट में एक सांस लेता है।
भस्त्रिका, कपालभाती, बाह्य, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उद्गीथ के बाद प्रणव प्राणायाम किया जाता है जो विपस्यना या प्रेक्षा ध्यान का दूसरा रूप है।
यह पूरी तरह से ध्यान पर आधारित है। हर एक को प्राणायाम करना चाहिए।
योगी समय की उपलब्धता के अनुसार, घंटों तक प्रणव का ध्यान करते हैं।
इस प्रक्रिया में सांस लेने की कोई आवाज नहीं आती है, और इस शांतिपूर्ण ध्यान से साधक मन की गहराई में चला जाता है | जहां उसकी इन्द्रियां मन में समां जाती हैं, मन प्राण में और प्राण आत्मा मैं | और आत्मा से साधक परमात्मा का अनुभव करता है |

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